58 जिलों में दो वर्ष के डाटा सत्यापन में पकड़ा खेल, समाज कल्याण विभाग इनके खिलाफ तेज की कार्रवाई लखनऊ
छात्रवृत्ति हड़पने के लिए निजी कॉलेज तरह-तरह के खेल कर रहे हैं। 58 जिलों में 202 निजी कॉलेज ऐसे पाए गए हैं, जहां पर छात्रवृत्ति लेने के बाद अगले वर्ष 70 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक विद्यार्थी घट गए। कुछ कॉलेजों में तो विभिन्न कोर्स में छात्रों की संख्या शून्य हो गई यानी यहां पर शत-प्रतिशत छात्र कम हो गए। दो वर्ष के डाटा सत्यापन में यह मामला पकड़ा गया। अब जिलों में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर इनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है।
उदाहरण के तौर पर हापुड़ में डीआर कॉलेज ऑफ एजुकेशन में डीएलएड कोर्स में 24 विद्यार्थी थे और अब इनकी संख्या शून्य हो गई है। ऐसे ही मॉर्डन प्रोफेशनल स्कूल एंड कॉलेज में बीएड में 60 विद्यार्थी थे और अब इनकी संख्या सिर्फ चार रह गई है। ऐसे ही चौधरी महेन्द्र सिंह डिग्री कॉलेज व एसएसवी इंटर कॉलेज में भी छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है। यह तो सिर्फ एक जिले का हाल है बाकी अन्य 57 जिलों में भी ऐसे ही स्कूलों में 70 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक छात्रों की संख्या में कमी आई है।
समाज कल्याण विभाग की ओर से सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखकर कॉलेजों के भौतिक सत्यापन के लिए कमेटी गठित कर जांच की गई तो मामला सही पाया गया। अब ऐसे कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल एक वर्ष की छात्रवृत्ति लेने के बाद यह विद्यार्थी कहां गायब हो गए? इसका कॉलेज ढंग से जवाब भी नहीं दे पा रहे हैं।
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सीटें भरने को फर्जी छात्रों का लिया सहारा
कॉलेजों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों की सीटें भरने के लिए विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति व सीट प्रतिपूर्ति का लालच दिया। यही नहीं तमाम कॉलेजों ने विद्यार्थियों से डॉक्यूमेंट लेकर उनका छात्रवृत्ति व फीस प्रतिपूर्ति फॉर्म भरकर अपनी सीट भर ली। अब छात्रवृत्ति को लेकर ऑनलाइन माध्यम से सत्यापन व समाज कल्याण विभाग की ओर से बढ़ाई गई सख्ती के कारण कॉलेजों की पोल खुल गई। अब वह विभाग को जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं।
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सत्यापन में जिन कॉलेजों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में दूसरे साल 70 प्रतिशत से अधिक छात्र कम पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। किसी भी कीमत पर गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
कुमार प्रशांत, समाज कल्याण निदेशक